#शीर्षक - नामदान
याचक आया द्वारा पर रखिए उसकी लाज
लोक परलोक को दीजिए आप संवार
नामदान का सतगुरु करिए मुझको दान
सारे जहां तेरे जैसा कोई नहीं दिखता महादान
नामदान से ही मुक्ति का मिलता द्वार
जीव के रोम रोम में बस जाता तेरा प्रेम प्यार
शब्द सुरति योग से सहजता से लगता ध्यान
कण कण में दिख जाते अविनाशी भगवान
नामदान परमात्मा की दया मेहर रहमत का बड़ा निशान
सतगुरु की कृपा से दोनों ज़हान में मिलता मान सम्मान
ईश्वर ही धरा गुरू रूप में अवतार
विषम भवसागर से नाम नाव से करते जन का बेड़ा पार
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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