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सोमवार, 6 फ़रवरी 2023

दास, गुरु दरस

              #दास

" मैं दास  सब कोई कहे कहियत दास होई 

साहिब सब घट जानत करनी ते जाहिर होई । "

#गुरु दरस 

गुरु दरस काटे सकल क्लेश ,

 तेरे मिल जाने पर कोई इच्छा नहीं रहती शेष, 

तेरी सेवा में महा आनंद मिलता,

 कितना सुन्दर स्वामी तेरा देश।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर 







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