#दास
" मैं दास सब कोई कहे कहियत दास होई
साहिब सब घट जानत करनी ते जाहिर होई । "
#गुरु दरस
गुरु दरस काटे सकल क्लेश ,
तेरे मिल जाने पर कोई इच्छा नहीं रहती शेष,
तेरी सेवा में महा आनंद मिलता,
कितना सुन्दर स्वामी तेरा देश।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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