शीर्षक - तेरे देश में प्रवेश कैसे पाऊं
तेरे देश में प्रवेश कैसे पाऊं
कह विधि तुझे ध्याऊं
गुण अवगुण करता थक गया
कैसे तुझे मनाऊं
जग का हर सुख मुझे सुख देता
परम सुख कैसे पाऊं
इस तन में अब बिरहा की तड़प लगा दो
किस यत्न से तेरा अपरंपार दर्शन देख पाऊं
मन में शीतलता क्या कर्म से आई
सो कर्मों मुझे दो बताई
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - जम्मू कश्मीर
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