#शीर्षक - मालिक की अदालत
मालिक की अदालत से कोई नहीं बच पाता
अच्छे बुरे कर्मों का हिसाब निष्पक्ष किया जाता
धन ,दौलत सब रिश्तों का मान खोटा नजर आता
कर्मों का भुगतान केवल आत्मा द्वारा दिया जाता
कर्मों का बोझ अकेला जीव ही उठाता
चतुर चालाकी कोई हथकंडा वहां काम नहीं आता
कर्मों का हिसाब जीवों को आवागमन में फंसाता
कर्मों का लेखा जोखा देने से सबका जी घबराता
कर्मों के हिसाब से केवल सतगुरु ही बचाता
जो जीव मन चित से सत्य का मार्ग अपनाता
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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