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सोमवार, 30 जनवरी 2023

मेरी प्रीत का कोई मोल न लगाना

#शीर्षक- मेरी प्रीत का कोई मोल न लगाना 

प्रीतम प्रिय प्यारे 

मेरी प्रीत का कोई मोल न लगाना 

कभी छोड़ मत जाना मैं बालक नादाना 

मेरी प्रीत का कोई मोल न लगाना ................. 

मेरा ज्ञान ध्यान अधूरा

मोहे दीजिए संतजना की धूलि, मेरी आसा कर दो पूरी 

मेरी प्रीत का कोई मोल न लगाना............................ 

मैं मेरी का मोही लग गया रोग ,मीठे लगते माया भोग 

भक्ति योग मैं दिया भुलाई अब कैसे पाऊं तेरी शरणाई

मेरी प्रीत का कोई मोल न लगाना............................

मति मलीन होई मोरी , दूजा भाव में सब जन्म खोई 

दीन दयाल अब कृपा तुम धारी , मोहे पापी की बेड़ी पार उतारी 

मेरी प्रीत का कोई मोल न लगाना............................


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर 


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