#शीर्षक- मेरी प्रीत का कोई मोल न लगाना
प्रीतम प्रिय प्यारे
मेरी प्रीत का कोई मोल न लगाना
कभी छोड़ मत जाना मैं बालक नादाना
मेरी प्रीत का कोई मोल न लगाना .................
मेरा ज्ञान ध्यान अधूरा
मोहे दीजिए संतजना की धूलि, मेरी आसा कर दो पूरी
मेरी प्रीत का कोई मोल न लगाना............................
मैं मेरी का मोही लग गया रोग ,मीठे लगते माया भोग
भक्ति योग मैं दिया भुलाई अब कैसे पाऊं तेरी शरणाई
मेरी प्रीत का कोई मोल न लगाना............................
मति मलीन होई मोरी , दूजा भाव में सब जन्म खोई
दीन दयाल अब कृपा तुम धारी , मोहे पापी की बेड़ी पार उतारी
मेरी प्रीत का कोई मोल न लगाना............................
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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