#शीर्षक - गूढ़ रंग
गूढ़ा रंग हरि का नाम का, रंग दो सतगुरु देव
तन मन धन से सेवा करूं, मिट जाए जीवन के सब क्लेश
नाम रंग लागा बडभागी, जाकी लिव तुम संग लागी
तेरे दरस को तरसे देवी देव , तेरी रहमत से पाई मानस देह
जीवन को दे संवार, तेरी कृपा से ही मिलता मुक्ति का द्वार
सेवा सिमरन सत्संग का दो दान , तूं दाता मेहरबान
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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