#माता गुजरी के पोतों की कहानी
माता गुजरी के पोतों की बड़ी विचित्र कहानी
शहादत दिवस को याद कर आंखों में भर जाता पानी
पिता दशमेश जैसा जग में कोई नहीं दानी
दूसरा कोई नहीं दिखा उनका सानी।
सरसा नदी का बड़ा गया पानी
शहादत के सफ़र की शुरू हो गई कहानी
सरसा नदी भी कर बैठी मनमानी
सैकड़ों सिक्खों ने दे दी प्राणों की कुर्बानी।
चमकौर गढ़ी ने पहली बार देखा ऐसा दानी
मानवता की सेवा में जो पुत्रों की दे गया कुर्बानी
माता गुजरी का लाल दानियों का दानी
कुर्बानियों को याद कर सबकी आंखों से बहने लगता है पानी
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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