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शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2022

आना जाना कैसा खेल

 #आना जाना कैसा खेल 

आना जाना कैसा खेल रचाया

दुनिया को उसी में उलझाया 

रचनाकार को हृदय से बिसराया 

मन को विषय वासनाओं का दास बनाया

सब ओर अज्ञान का अंधकार छाया

मानव को सत्य के रास्ते से भटकाया 

हे माया तूने सबको भ्रमाया

धर्म कर्म को भी पाखंड बनाया

सच्ची भक्ति का नियम भुलाया

इंसा को इंसा से लड़ाया

सच को झूठ, झूठ को सच कर दिखलाया

ऐसा मूर्ख बनानेवाला ये कलयुग आया 



स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर 

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