शीर्षक - दुनिया का खेल निराला
हे भैया! इस दुनिया का खेल निराला
लगता बंद है इनका अक्ल का ताला
जिसने छोड़ना है उसे गले से लगाते
अपने पराए का फर्क नहीं कर पाते
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर इकाई
शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार सभी एक है परिवार बना ले इसको जीवन का आ...
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