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बुधवार, 3 अगस्त 2022

घटा


#घटा
ऐ घटा अब बादल बनकर बरस जाना
मेरे अतृप्त मन को अपनी प्रेम बूंद से सींच जाना

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर

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