दया निधान शरण तुम्हारी मुक्ति का धाम
कण कण में बसता है तुम्हारा नाम
पल में संवारते सबके काम
मेरे हृदय में बस जाओ राम
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा जम्मू कश्मीर
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा जम्मू कश्मीर इकाई
साधु-संत का संग ,मिटाता कोटि पाप वचन मान भक्ति कर, मिट जाता आपा भाव
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें