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बुधवार, 15 सितंबर 2021

गणेश वंदना


 #विषय - गणेश वंदना

  विधा - छंदमुक्त कविता


प्रथम  नमन गणपति को करे, 

तन मन के सब दुख हरे । 


माँ गौरा को बहुत प्यारे, 

पिता महादेव की आंखों के तारे। 


रिद्धि सिद्धि के तुम ही दाते, 

भक्तजन सब फल तुम से पाते। 


विघ्न बाधाओं को तुम क्षण में हरते, 

मंगल सबका गौरीनंदन करते । 


एकदंत अनेक नाम तुम्हारे, 

प्रेम से तुमको सब बप्पा पुकारे। 


 स्मरण तुम्हारा दुख मिटाये, 

सबको सुख समृद्ध बनाये। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर

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