कविता - कृपानिधि अब तो कृपा कीजे
कृपानिधि अब तो कृपा कीजे
मेरे अवगुणों को बख्श लीजे
तुम्हारी शरण मैं मांगू दिन रात
मोहे राखो देकर हाथ।
कृपासिंधु दीन दयालु
अपने जन पर सदा कृपालु
तेरे नाम दुख तोडनहार
मिट गया अज्ञान अंधियारा।
मैं अवगुण भरी तोहे पुकारा
मोहे नारायण एक सहारा
डूबत जन की लाज रखीजै
नाम अपने की टेक दीजै।
नाम अपने का जाप जपीजै
अपर अपार दर्शन दीजै
तेरा दर्शन जन्म मरण का दुख मिटावै
मन की सगल मैल गवावै।
अमरजीत सिंह
जम्मू-कश्मीर , जम्मू
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