जग पर संकट पड़ा है भारी
हमारी रक्षा करो वनवारी
हमारी तुम पर ही टेक
तुम ठाकुर समर्थ देव।
जो जो तुम्हारी शरण आया देव
तिस का पार उतारा किया देव ।
हमें भी आस भरोसा थारो
संकट भी थारे आगे हारो।
जो भी चाहा तुमसे पाया
सदा भरें तेरे भंडारा।
इस संकट को क्षण में हरो
जग में सारे सुख करो।
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