#शीर्षक- बसंत ऋतुराज
बसंत ऋतु तूं जल्दी आ
सूखे हुए पेड़ पौधों में नव जीवन की उम्मीद जगा
उम्मीद खोकर जो हार चुके है
जीवन जीने की रोशनी दे आ
सपने लेते जो सो गया है
उन्हें मेहनत परिश्रम का पाठ पढ़ा
सीखा दे उनको पतझड़ के बाद ही हरियाली आती
मेहनत लग्न ही सफलता दिलाती
जीवन की पगडंडी पर चलते चलते संघर्षो राह का अपना
बसंत ऋतु तूं मानव को जीवन का असल पाठ सीखा।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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