#शीर्षक- फ़रियाद
मालिक तेरे दर पर फरियाद करने आया हूं
तेरी रहमतों के सहारे जीते जी मरने आया हूं
मैल भरे मन में निर्मलता पाने आया हूं
तेरे रंग में रंग कर अपना आप गंवाने आया हूं
तेरे हुक्म की कार कमाने आया हूं
विचारों में तेरा विचार जानने आया हूं
जो रास्ता भूल गया था उसी पथ पर चलने आया हूं
डोलते फिरते चित में एकाग्रता पाने की चाह लेकर आया हूं
जात पात धर्म कर्म में बंट चुके जीवों को एकाकार का संदेश सुनाने आया हूं
भेदभाव से ऊपर उठकर सचिदानंद प्रभु में मिलने आया हूं
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला : सांबा, जम्मू कश्मीर
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