#शीर्षक- सतगुरु की आरती
सतगुरु जी तेरी जय हो, सतगुरु जी तेरी जय हो
तुम हो सब ज्ञान के ज्ञाता, तुम सबके पित माता
सब मैल तुम गंवाते , सब तीर्थ तुम में ही समाते
मानुष जन्म सफल बनाते, अपना नाम आप ही जपाते
दुख दर्द निकट नहीं आते , तेरी शरण में सुख ही सुख पाते
भजन सिमरन के तुम ही दाते , तुम ही सेवा सिमरन सत्संग में लगाते
सतगुरु जी की आरती जो जीव सुरति से गाते, वो ही मुक्ति पाते
सतगुरु जी तेरी जय हो, सतगुरु जी तेरी जय हो
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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