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बुधवार, 7 दिसंबर 2022

निंदक अभागा रे भाई

 #निंदक अभागा रे भाई 

"निंदक अभागा रे भाई ,

 पर अवगुण की गठरी हमेशा रहे उठाई 

निंदा का भार अति भारी मेरे भाई 

भवसागर में कोटि कोटि जन्म रहेगा गोता खाई ।"


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर 




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