#श्रद्धा
सतगुरु तुम्हे श्रद्धा के फूल चढ़ाता हूं,
जीवन का हर एक श्वास तेरे लेखे लगाता हूं ।।
तेरी उपमा को रोम रोम से गाता हूं,
तेरे उपकार को याद कर सदा सदा शीश झुकाता हूं ।।
जीवन की हर मुश्किल का हल तुझी से पाता हूं ,
तेरा प्रेम के रंग में रंगना चाहता हूँ ।।
विषय विकारों में फंसा तुझे बुलाता हूं ,
तेरी टेक से ही दुख दर्द को सह जाता हूं ।।
जीवन के हर क्षण में तेरी बडाई सबको सुनाता हूं ,
तेरा होने का राग हमेशा सबके आगे अलपाता हूं ।।
पर अपनी करनी के कारण तेरा आगे लज्जाता हूं ,
तेरे दीनदयाल स्वभाव के कारण हमेशा पाप बख्शाता हूं।।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा, जम्मू-कश्मीर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें