फ़ॉलोअर

सोमवार, 12 दिसंबर 2022

शर्मसार

 #शर्मसार 

" मेरे परवदगार जीउ शर्मसार हुआ मैं कर्म अपने के साथ 

   दर पड़े को उबार लो दे कर अपना हाथ ।"


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर 


कोई टिप्पणी नहीं:

प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...