#सचखंड
" सतगुरु मेरे तूं सचखंड का वासी तहां बसत है अचल अविनाशी ,
चार पदार्थ,अष्ट सिद्धि नौ निधियां सब तेरे चरणों की दासी।"
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर
शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार सभी एक है परिवार बना ले इसको जीवन का आ...
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