#शुभकर्म
सतगुरु दाता मोही शुभ करना सिखाया
मोहे पापी मनमति ने शुभ उपदेश को भुलाया
बाहरी कर्म काण्डों में व्यर्थ समय गंवाया
अंतर तीर्थ का कभी न नहाया
मृगतृष्णा में सकल जन्म बिताया
सांसारिक सुख की खातिर परमपिता परमेश्वर को बिसराया
ऐसी मति मारी मेरी माया
जंजाल में खुद को फंसाया
सब ओर अज्ञानता का अंधकार छाया
मेरे मन तूने सुखदाता का अविनाशी नाम भुलाया
सतगुरु मोही अपने पास बुलाया
प्रेम भक्ति का मार्ग मुझे बताया
सतगुरु प्रीतम ने मेरे सब अवगुणों को जलाया
डोलते गिरते मन को अंतर में टिकाया
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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