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सोमवार, 21 नवंबर 2022

विरह की तड़प

 #विरह की तड़प

विरह की तड़प किसी विरले को लगती है 

प्रेम प्यार में भजन बंदगी, केवल तेरी निवाजी आत्मा करती है


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर 

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साधु-संत का संग

 साधु-संत का संग ,मिटाता कोटि पाप  वचन मान भक्ति कर, मिट जाता आपा भाव