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शुक्रवार, 26 अगस्त 2022

आत्मा की पुकार

 #शीर्षक-आत्मा की पुकार 

हे जगदीश्वर मेरी आत्मा  नित्य दिन करें पुकार

अपने जन को अब तो लो तार 

साईं सब ओर अंधेरा छाया है

मोह माया ने कोहराम मचाया है

मेरे मन के सब भ्रम मिटा दो नाथ 

मेरे मस्तक पर रख दो अपना रहमतों भरा हाथ 

सतगुरु तूं ही मीत सखा तूं ही दाता दातार 

तेरी रहमत बिना कोई नहीं होता भवसागर से पार

सृष्टि का कण कण तुझे ही गाता है

तेरी रहमत से ही सबको जीवन मिल पाता है

मेरी आत्मा ने अब तुझे पहचान लिया

जन्मों जन्मों का हमारा तेरा नाता है यह भी अब जान लिया

आत्मा को अब प्रीतम प्यारे इस देश से आजाद करो 

 घोर पाप जो हमसे हुए उसे दयानिधान माफ करो 

हे कृपासिंधु हम भी अपने में मिला लो 

आवागमन के चक्र से हमेशा के लिए बचा लो


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर 



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