कविता - गोरों से लड़ा हूं मैं
गोरों से लड़ हूं मैं
अपने हक़ के लिए दी है अनेक कुर्बानियां
मेरे बलिदान की अनेक कहानियां
भारत का किसान हूं मैं।
दूसरों को जीवन देने के लिए
भूखा प्यासा काम करता है
अपनी नहीं परवाह मुझे
मैं देश के लिए जीता मरता हूं मैं
मभारत का किसान हूं मैं।
सरहदों पर जो खड़ा
वो मेरा ही हम हम साया है
देश के लिए कुर्बान होने
मैंने ही उसे सिखाया है
भारत का किसान हूं मैं।
अपने हकों को लेना मुझे आता है
मैं हिंसा नहीं अहिंसा पर विश्वास रखता हूं
गूंगे बहरे कानों में
अपनी आवाज सुनाने का प्रयास करता हूं
भारत का किसान हूं मैं।
ठंड, गर्मी की परवाह नहीं मुझे
सहता कई सदियों से आया हूं मैं
देशवासियों का पेट भरने के लिए
जी तोड़ मेहनत करता हूं मैं
भारत का किसान हूं मैं।
अमरजीत सिंह
जम्मू-कश्मीर, जम्मू
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