नमन मंच 🙏🙏🙏
#हिंददेश परिवार अमेरिका इकाई
दिनांक - 27 जून 2021 से 03जुलाई, 2021
दिन - रविवार से शनिवार
#विषय - संगत की रंगत
विधा - गद्य - पद्म
लेख- जैसी संगत वैसी रंगत
"कबीर मन पंखी भइओ उड़ उड़ दह दिस जाइ।जैसी संगत मिलै सो तैसो फल खाई।"
भक्त कबीरदास जी का यह दोहा संगति का महत्व प्रकट करता है। इस दोहे में भक्त कबीर दास जी ने मन की तुलना पक्षी से की है जो दस दिशाओं में घूमता रहता है।वह कहते हैं कि मनुष्य जैसी संगति करेगा उसी के अनुसार फल फल भी भुगतेगा। मनुष्य चरित्र के निर्माण संगति के अनुसार होता है उसकी संगति ही उसे अच्छा या बुरा बनाती है।साधु संतों की संगति उसे ईश्वरीय गुणों से भरपूर कर देती है। उसका अंतर में दया, संतोष, प्रेम,क्षमा, विनम्रता, सेवा, समर्पण, त्याग की भावना उत्पन्न होती है। सज्जन पुरुषों की संगति सही या ग़लत का निर्णय करने में सहायक सिद्ध होती है। दुर्जनों की संगति मनुष्य को विनाश की ओर ले जाती है और उसके अंतर में विनाशकारी गुणों को उत्पन्न करती है।बुरी संगति के प्रभाव के कारण हम घृणित कार्य करने में भी आनंद अनुभव करते हैं। क्योंकि हमारे हृदय में विकारों की मैल जम जाती है। विकारों की मैल हमारी बुद्धि और विवेक को शून्य कर देती है। अतः हमें संगति का चयन उसके परिणाम को सामने रखकर करना चाहिए।
अमरजीत सिंह
जम्मू-कश्मीर, जम्मू
1 टिप्पणी:
अति महत्वपूर्ण लेख है
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